
हृदयभूमि, भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के नगर निकाय चुनाव उसी पुरानी पद्धति से कराने पर विचार किया जा रहा है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो राज्य में निकट समय में होने वाले स्थानीय नगरपालिकाओं के चुनाव सीधे होंगे। इसमें अध्यक्ष का चुनाव नगर पालिका के पार्षद नहीं बल्कि नगर की जनता करेगी।
बीते वर्षों में यह देखने में आया है कि भारतीय जनता पार्टी के राज में नगरीय चुनाव इसी पद्धति से होते आए हैं। इस दल के पास सांगठनिक शक्ति होने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्याप्त लीडरशिप है।
जबकि विपक्ष दल के पास इसकी कमी देखी जा सकती है। यहां सारे फैसले हाईकमान से होने की वजह लोकल लीडरशिप उस तरह पनप नहीं पाती कि यहां संगठन की स्थानीय शाखा अपने स्तर पर नेता चुन सके। इस वजह से विपक्षी पार्टी के सत्ता में आने पर निकाय चुनाव में अध्यक्ष का जनता से सीधा चुनाव कराने के परोक्ष चुनाव प्रणाली को महत्ता दी जाती है। ताकि बहुमत न होने पर भी जोड़-तोड़ के जरिए पार्टी का नगर निकाय अध्यक्ष चुना जा सके।
बहरहाल केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के साथ यहां चल रही चुनाव लहर को देखते हुए पार्टी स्तर पर मंथन कर प्रशासनिक लेवल से भी पता लगाया जा रहा है कि क्या अब मध्यप्रदेश में फिर से निकाय अध्यक्ष के सीधे चुनाव पार्टी सिंबाल पर कराए जा सकते हैं। यदि कहीं कोई पेंच नहीं आया तो हमें मध्यप्रदेश में आगामी नगरीय चुनाव में जनता की शक्ति का प्रदर्शन देखने को मिल सकेगा।