May 14, 2026 |

#धर्म : बोहरा समाज के सैयदना साहब आज शाम हरदा आएंगे

राजकीय अतिथि के रूप में होगा हरदा प्रवास

Hriday Bhoomi 24

हृदयभूमि, हरदा।

बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरूू आली कदर मुफद्दल सैफुद्दीन सैयदना साहब 38 साल बाद आज हरदा आकर प्रवचन देंगे। 80 साल के इतिहास में वे ऐसे तीसरे धर्मगरू होंगे जो हरदा आ रहे हैं। उनके स्वागत और सम्मान में बोहरा समाज ने अपनी मस्जिद को आकर्षक ढंग सेे सजाया है। वे यहां  राजकीय अतिथि के रूप में आ रहे हैं।

दस साल की कोशिशों पर मिला तोहफा-

ज्ञात रहे कि सन 2014 में धर्मगुरु बनने के बाद सैयदना सैफुद्दीन साहब की यह पहली हरदा यात्रा है। इसके लिए समाज गत 10 वर्षों से कोशिश कर रहा था, अब जाकर यहां के मोमिनों को उनके आगमन का तोहफा मिला है। उनसे पहले यहां लगभग 38 वर्ष पूर्व सन 1986 में बोहरा समाज के 52वें धर्मगुरू सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब आए थे।

सैयदना साहब की हरदा यात्राएं-

समाज के वरिष्ठ सदस्य बाबू भाई बंदूकवाला ने बताया कि हरदा में करीब 80 साल पहले 48वें धर्मगुरू सैयदना हुसामुद्दीन साहब आए थे। वे मुल्ला मुख्तार हुसैन व अहसान अली के घर रुके थे। जहां उन्होंने समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद 1986 में 52वें धर्मगुरु सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब हरदा आए। उन्होंने नगर पालिका के पास एक घंटे तक प्रवचन दिए। वे पचमढ़ी से हरदा होते हुए बुरहानपुर गए थे।

बिना ब्याज ऋण देने की सीख-

यहां उन्होंने समाज के लोगों को आगे बढ़ने के लिए बुरहानी ‘कजें हस्ना’ का जिक्र किया था। इसके तहत समाज के लोगों को बिना ब्याज के लोन दिया जा रहा ताकि समाज के लोग कारोबार कर आगे बढ़ सकें। अब तक 40 परिवारों को इसका फायदा मिला है।

व्यापार की प्रेरणा दी-

बाबू भाई ने बताया कि 38 साल पहले आए सैयदना साहब ने समाज को नौकरी नहीं, व्यापार करने के लिए प्रेरित किया। व्यापार भी पूरी ईमानदारी से करें। उन्होंने फरमाया था कि बोहरा समाज के लोग जहां रहों, जिस मुल्क में रहते हैं, उस मुल्क के प्रति वफादार रहो।

दस साल से चल रहा टिफिन परिवार –

टिफिन समाज के अमजद बंदूकवाला ने बताया कि 52वें धर्मगुरु के आदेश पर एफएमबी के तहत घर-घर टिफिन भेजे जा रहे हैं, जो एक मिसाल है। यह पिछले 10 साल से चल रहा है। समाज के भोजनालय में 65 परिवारों का शाम का भोजन एकसाथ बनता है। इसे टिफिन के माध्यम से आज भी भेजा जा है। यह भोजन कम नमक, मिर्च का शुद्ध भोजन होता है. जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके संचालन के लिए समाज के स्तर पर ही आपसी सहमति से किया जा रहा है।


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