प्रदीप शर्मा संपादक।

- “भारत के दो ही नरेंद्र एक विवेकानंद
दूसरे नरेंद्र मोदी।”
वो इसलिए कि दुनिया में इस नाम से शायद दो ही वो खास शख्सियत होंगी जिन्होंने भारतवर्ष के साथ यहां की सभ्यता और संस्कृति का प्रबल संदेश पश्चिमी जगत को पहुंचाया।
– सबसे खास बात यह कि एक संत है और एक देश का नेता हमारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ।
– तुलना तो कभी भी, किसी से नहीं की जा सकती, क्योंकि सभी पक्षियों की उड़ान में उनके पदचिन्हों का पता नहीं चलता है। फिर भी नरेंद्र नाथ दत्त या कहें स्वामी विवेकानंद या कहें नरेंद्र मोदी तो उनके जीवन कहानी सभी को प्रेरणा देगी।
– व्यक्तिगत तौर पर मुझे याद है कि हमारे साथ के एक युवा साथी ने स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरित होकर दक्षिण भारत के कन्याकुमारी स्थित तट पर द्वीप में समाधि लेकर आजीवन धर्म प्रचार का व्रत लिया था। वह अभी कुछ समय पूर्व सिवनी-मालवा के समीप एक ग्राम बावड़िया में समाधिस्थ हुए हैं।
– वैसे जिन महान शख्सियत नरेंद्रनाथ दत्त का हम जिक्र कर रहे हैं उन्हें विवेकानंद नाम तो बाद में मिला था तब वे कलकत्ता के युवा नरेंद्र नाथ दत्त थे। उन्होंने “स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी” से दीक्षा लेकर दुनिया में भारतीय ज्ञान का दीप जलाया।
– शिकागो में हुई पहली धर्मसभा में ये नरेंद्र यानी समर्थ रामदास जी के शिष्य स्वामी विवेकानंद ही थे। जिन्होंने अपने संबोधन “बहनों और भाईयों” से सबको मोह लिया था।
फिर क्या था पूरी दुनिया को वैदिक ज्ञान का वह प्रवचन (स्पीच) सुनकर एक पश्चिमी महिला ने जैसे ही इस चिर-यौवन वैरागी सन्यासी विवेकानंद से हाथ मिलाया तो वह अदभुत ज्ञान में चली गई।
– उन्होंने सीधे-सीधे (अपुष्ट ) कहा – ” विवेक प्लीज़ गिव मी ए बेबी”
# फिर सन्यासी विवेकानंद ने भी साफ कह दिया कि “आय एम योर बेबी”
इसके बाद उस पश्चिमी अध्यात्मिनी ने स्वामीजी द्वारा दिए नाम निवेदिता से हिंदुस्तान में रहकर अपने जीवन का समय बिताया। वे एक बड़ी संत थी।
- दूसरे संत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते समय यह विचार करना आवश्यक है कि यह शख्स राजनीतिज्ञ नहीं है। केवल संगठन का वह कार्यकर्ता है जिसे अचानक गुजरात का तीन बार सीएम बनने बाद
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सीधे नाम लेखर पुकारकर बुलाया था। वो तब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और वर्तमान में केंद्र सरकार के रक्षा मंत्री।
आज यही हस्ती दुनिया के तमाम देशों के दिल पर भारतीय संस्कृति और विचारधारा की इबारत लिख रही है।
कभी किसी भविष्यवक्ता ने कहा था कि नई सदी में भारतीय संस्कृति की इबारत लिखने कुछ हस्तियां आएंगी। शायद इनमें शायद ये नरेंद्र या अन्य भी होंगे।
मोदी अभी वर्तमान समय की हस्ती हैं जिनके बारे में आगे भी और लिखे जाने की गुंजाइश है। इसलिए पुरानी चिट्ठी की तरह इस पोस्ट को भी “शेष फिर ” पर विराम दे रहा हूं।