
खबर यह है कि भाजपा से मुक्त नगर के एक स्वयंभू नेता को शहर के वार्डों में बड़ा भारी सम्मान मिल रहा है। उन्हें देखकर करीबी लोग घर के दरवाजे नहीं खोल रहे। और गैलरी में महिलाएं और अन्य लोग उन्हें देखकर धिक्कार रहे हैं।
महान शायर ग़ालिब साहब के अनुसार ‘बैटरी बे-आबरू तेरे कूज़े से निकले हम’
‘जहाँ मया मिली न राम’
– यह कहानी है हमारे शहर के एक नेता की जो ‘मलाई जीमने’ के बाद पंगत से कुलाटी मार गए।
*मेरी पोस्ट का हरदा की राजनीति से कोई नाता नहीं/ ये सब जानते हैं*