हरदा में वोटों का बेमिसाल ध्रुवीकरण
किंग मेकर बने सुरेंद्र जैन, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओम पटेल और लक्ष्मीनारायण पंवार
प्रदीप शर्मा संपादक

मप्र विधानसभा चुनाव 2023 का चुनाव यूं तो भाजपा की विराट केसरिया लहर में डूब गया, मगर अप्रत्याशित ढंग से कांग्रेस ने हरदा जिले की दोनों सीट छीनकर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
इस बारे में सभी के अपने-अपने अनुमान हो सकते हैं जैसे- अल्पसंख्यक मतों और समाजों का ध्रुवीकरण आदि-इत्यादि। मगर इस जीत में कुछ नेताओं का परोक्ष रूप से महती योगदान विशेष रहा। दरअसल यहां की राजनीति में तब एकाएक बड़ा परिवर्तन आया जब लगातार दो बार नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव में स्वयं और तीसरी बार अपनी पत्नी को विजयी बनाने वाले खांटी नेता सुरेंद्र जैन ने एकाएक पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आकर भाजपा में पनप रहा असंतोष उजागर कर दिया। जैन के आने से भाजपा हरदा शहर में इस कदर पिछड़ी कि इस लीड को नहीं पाटा जा सका। पहले ही इसकी पटकथा लिख चुके कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओम पटेल ने विश्नोई समाज के असंतोष को देखकर पार्टी के वरिष्ठ नेता लक्ष्मीनारायण पंवार को समय रहते मना लिया।

टिमरनी में नागु पटेल
वैसे तो टिमरनी में भाजपा की हार के अनेक कारण हो सकते हैं। मगर यहां भी कुछ किंग मेकर्स ऐसे रहे हैं जिनकी रणनीति पर काम करने से कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत शाह को जीत मिली। यहां किसान कांग्रेस नेता नागु पटेल ने मगरधा और सिराली के आसपास क्षेत्र में मोर्चा संभालकर अंकित बाबा को अन्य क्षेत्रों में काम करने हेतु फ्री-हैंड दे दिया। यही वजह रही कि इनकी भूमिका से हरदा जिला भाजपा की विराट केसरिया लहर से अछूता रहा।