#यह कैसा बागवां : महान साहित्यकार के निधन में नहीं पहुंचा कोई परिजन
श्रीनाथ जी खंडेलवाल ने किया था शिव पुराण और मत्स्य पुराण का हिंदी अनुवाद

हृदयभूमि चिंतन :
यह कैसा बागवां जिसे लगाते हैं माली (मालिक) मगर उसके लगाए गए फूल उसके किसी भी काम नहीं आते। महान साहित्यकार के निधन में नहीं पहुंचा कोई परिजन!
कहानी है एक ऐसे ही माली (प्रसिद्ध लेखक) की जिसने परिवार रूपी बगीचा संवारा, इनका बेटा बिजनेसमैन, बेटी वकील, करोड़ों की प्रॉपर्टी और लगभग 80 करोड़ की संपत्ति। मगर जब उनका वृद्धाश्रम में निधन हुआ तो कोई परिजन दाह-संस्कार में शामिल नहीं हुआ।
इन दिनों सोशल मीडिया पर यूपी के वाराणसी निवासी एक ऐसे ही लेखक श्रीनाथ खंडेलवाल की कहानी वायरल हो रही है। जिन्होंने शिव पुराण और मत्स्य पुराण का हिंदी अनुवाद किया। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने 400 से अधिक किताबें लिखीं। और जब उनका निधन एक वृद्धाश्रम में हुआ तब वे अपने पीछे 80 करोड़ की संपत्ति छोड़ गए। किंतु उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देने भी नहीं आए प्रोफेशनल बच्चे। इस घड़ी में बाहर के दूसरे लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया।
श्रीनाथ खंडेलवाल का जीवन कभी वैभवशाली था। उन्होंने अपनी लेखनी से भारतीय साहित्य को समृद्ध कर शिव पुराण और मत्स्य पुराण जैसे अनमोल ग्रंथों का हिंदी अनुवाद किया। उनकी लिखी 3000 पन्नों की मत्स्य पुराण की रचना आज भी विद्वानों के बीच चर्चित है। उन्होंने न केवल धार्मिक ग्रंथों पर काम किया, बल्कि आधुनिक साहित्य और इतिहास पर भी कई किताबें लिखीं। उनकी पुस्तकें हिंदी, संस्कृत, असमिया और बांग्ला जैसी भाषाओं में उपलब्ध हैं। जीवन के अंतिम दिनों में वे नरसिंह पुराण का अनुवाद पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह अंतिम इच्छा अधूरी रह गई।
कतिपय कारणों से उन्हें परिवार से अलग होकर एक वृद्धाश्रम में बिताना पड़ा। गत 28 दिसंबर 2024 शनिवार को जब उनकी हालत बिगड़ी, तो अस्पताल से परिजनों को सूचित किया। लेकिन बेटा और बेटी नहीं आए।
अंततः सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर, साथी रमेश श्रीवास्तव, आलोक और शैलेंद्र दुबे ने उनका पार्थिव शरीर मणिकर्णिका घाट पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
