करणी सेना का प्रदर्शन : क्या होता गर एक आरोपी भीड़ के हवाले कर देते
करणी सेना का प्रदर्शन और एक पक्ष व्यवस्था का भी

प्रदीप शर्मा हरदा।
आखिर नेहरू स्टेडियम में करणी सेना के विराट धरना प्रदर्शन बाद सरकार झुकी और 2 पुलिस एसआई तथा 3 अन्य कांस्टेबल पर कार्रवाई कर शासन द्वारा इन्हें भोपाल पुलिस लाइन में अटैच करने के आदेश माने। मगर अहम सवाल अभी भी है कि घटना दिनांक 13 जुलाई को पुलिस अभिरक्षा में आरोपी को समूह के हवाले कर दिए जाता तो क्या होता।
बल में निराशा न आए
धरने के बाद जहां जनभावना करणी सेना के पक्ष में सामने आई हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग का पक्ष अनदेखा रह गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि 13 जुलाई को करणी सेना का प्रदर्शन और ज्ञापन अपनी जगह है। मगर बिना अनुमति हजारों की भीड़ द्वारा थाने का घेराव कर आरोपी उनके हवाले करने से पुलिस अभिरक्षा में आरोपी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी।
बहरहाल करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में भूख हड़ताल और धरने के सामने प्रदेश सरकार के हाथ-पांव फूल गए। और शाम ढलते-ढलते केंद्र और स्टेट से लगातार चल रही फोन घंटियों के बाद नौकरशाहों ने आगे आकर करणी सैनिकों की कई मांगें तुरंत मान ली। शेष मांगें भी हल करने का आश्वासन दिया।
*दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई*
इस दौरान एसआई अनिल गुर्जर, रिपुदमन सिंह, हेड कांस्टेबल तुषार धनगर, आरक्षण संजू चौहान, सुनील गौर को निलंबित कर भोपाल पीएचक्यू भेजने का आश्वासन दिया। वहीं 13 जुलाई की घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी।
*क्या नया राजनीतिक दल बनेगा*
देश के अनेक राज्यों सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश से आए जनसमूह और लोगों का समर्थन देखकर करणी सेना ने भी मंच से एक नए राजनीतिक दल बनाने का ऐलान कर दिया। मीडिया से भी करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह ने भी इसकी पुष्टि की। मगर अहम सवाल है कि देश में पहले भी जाति या धर्म के आधार पर पहले भी बने ऐसे नये राजनीतिक संगठन आज किस मुकाम पर हैं। इसलिए अभी सारी बातें समय के गर्भ में है।
