
प्रदीप शर्मा संपादक
गत दिवस बांदा जेल में आजीवन सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के माफिया डाॅन मुख्तार अंसारी की हृदयाघात से हुई मौत के बाद प्रदेश की राजनीति में बवेला मचा हुआ है। कुछ दलों के बड़े नेताओं ने अंसारी की मौत पर न केवल सवालिया निशान लगाकर एक वर्ग विशेष की सहानुभूति बटोरने का नाटक किया। बल्कि इस अपराधी के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उसके अंतिम संस्कार में भी जा पहुंचे।
यूं तो मामला यूपी का है मगर बिहार में विपक्षी दलों के बड़े नेता तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव सरीखे और भी अन्य मठाधीशों ने मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिशें की। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव हों या कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं की भूमिका से उनकी सारी कलई खुल गई है।
यहां बता दें कि एक जमाने में मुख्तार अंसारी गैंग और बृजेश गैंग के बीच गैंगवार जैसी नौबतों दौरान यूपी का आवाम किस तरह खौफ के साए में जीता था। इस खूंखार अपराधी पर मर्डर, हत्या के प्रयास, पुलिस जवान की हत्या सहित दर्जनों मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। एक मामले में तो वह आजीवन कारावास की सजा तो भुगतकर जेल से ही अपनी गैंग चला रहा था।
इसका खौफ इतना था कि यह जेल में रहते हुए चुनाव लड़कर आसानी से जीतता आया है। ऐसे खूंखार डाॅन की स्वाभाविक मौत पर शोक जताकर राजनीतिक दलों का विधवा प्रलाप हैरानी भरा है। लोकसभा चुनाव के मौके पर चंद वोटों की खातिर ऐसी नौटंकी कर ये दल और नेता आखिर कौन सा मुंह लेकर जनता के बीच वोट मांगने जाएंगे।
