##महाकुंभ # पुण्य स्नान करने जाने के लिए पुलिस जवान की मजेदार चिट्ठी
चिट्ठी की पुष्टि नहीं कर रहे, मगर है यह मजेदार

हृदयभूमि स्पेशल –
इलाहाबाद में चल रहे 44 दिवसीय कुंभ मेले को इस बार विशेष महत्ता दी गई है। वह इसलिए कि तिथि गणना के मान से इसे महाकुंभ की श्रेणी में रखा गया है। ऐसा कुंभ 144 वर्ष में एक बार ही आता है। यह महाकुंभ इसलिए भी प्रमुख है कि इस मौके पर श्रद्धालुओं को गंगा-यमुना और विलुप्त नदी सरस्वती के संगम में स्नान करने का पुण्य होगा। इस कारण देशभर से लाखों लोग प्रतिदिन इलाहाबाद जाकर गंगा त्रिवेणी में स्नान का लाभ उठा रहे हैं।
तो भला शासकीय कर्मचारियों का अमला भी क्यों पीछे रहे। इस क्रम में एक कथित पुलिस जवान द्वारा अपने विभाग से छुट्टी मांगने का जो आवेदन कथित तौर पर अपने विभाग को लिखा। हम इसकी पुष्टि नहीं करते मगर, अज्ञात कारण से यह सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस आवेदन की बातें सभी पाठकों को भी मजेदार लगेगी। स हम इस चिट्ठी की वायरल काॅपी ज्यों की त्यों आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।👇

आवेदन का मजमून यदि नहीं पढ़ पाए हों तो वह इस प्रकार है 👇
“सेवामें
श्रीमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
हाईवे यातायात जिला जयपुर ग्रामीण
विषयःः आक्समिक अवकाश चाहने बाबत ।
महोदय,
उपरोक्त विषय मे निवेदन है कि मैं प्रार्थी कान्स्टेबल जयसिंह बेल्ट नम्बर 2162 श्रीमान महाकुंभ 2025 (ऐसा संयोग आगामी 144 साल के बाद ही बनता है, क्योंकि एक अर्द्धकुंभ 6 साल से अतः दो अर्द्धकुंभ से एक पुर्ण कुंभ बनता है कुल 12 साल से लगता है। तथा 12 पुर्णकुंभ से महाकुंभ का संयोग बनता है अर्थात् 12 पुर्णकुंभ का कुल समय होता है 12-12=144 साल।
अतः श्रीमान इस प्रकार मुझ प्रार्थी के जीवन काल मे पुनः महाकुंभ का योग नहीं बनेगा) का दूसरा शाही स्नान 29 जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के दिन होगा। मौनी अमावस्या का स्नान हर सनातनी के लिए खास माना जाता है।
धार्मिक मत है कि मौनी अमावस्या तिथि पर गंगा स्नान करने से व्यक्ति द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए गए पाप कट जाते हैं। साथ ही जीवन में अमोघ फल की प्राप्ति होती है।
श्रीमान मुझ प्रार्थी को मेरे जन्म-जन्मातंर के समस्त पापों को काटने के लिये ऐसा मौक़ा दोबारा नहीं मिलेगा। अतः मुझ प्रार्थी को 03 योम आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की कृपा करे।
प्रार्थी जयसिंह
कान्स्टेबल नम्बर 2162
कार्यालय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हाईवे यातायात जिला जयपुर ग्रामीण”
