
*फोटो साभार*
#प्रदीप शर्मा संपादक #
#डूबती यादों में मिली तस्वीर तो
मुझे भी याद आया/
वो अफसाना जिसे कभी
दीवारों पर लगा दिया था/
अब ये तस्वीरें ही यादों का वो करिश्मा बताती हैं –
बस इतना
कौन था वो इंसां…
एक तुम,
एक म. म.. मैं,
और वो
तो है न…
हा.. हा.. आपकी जिंदगानी सहेली।
हां ये है भी कितनी अजीब!
कभी मिलती है मित्रवत,
कभी शत्रुवत या कभी
समय के साथ टूटते बिखरते रिश्तों में
अंगारों सी।
और कभी
मिल जाओ यादों में तो
दीवारों पर लगी ऐसी तस्वीर सी!
जो भी हो तुम
दीवारों पर लगी मेरी यादें/
तुम्हें भुलाना मुमकिन नहीं
तो मुश्किल जरूर है।
बस दूर न होना कभी…
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*(तस्वीर से याद आई मेरी पुरानी काव्य रचना)*
