बंद कमरे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ क्या खिचड़ी पकी
शिवराज को क्या टास्क मिला, चर्चाओं के केंद्र में
प्रदीप शर्मा संपादक
राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि पार्टी आलाकमान की बेरुखी और पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की पारी न मिलने से शिवराज सिंह चौहान नाराज हैं। प्रदेश में भाजपा की विराट जीत का श्रेय उन्हें न देकर संगठन के एक बड़े नेता ने चुनाव में जीत के लिए लाड़ली बहना योजना को दरकिनार कर साफ कह दिया था कि – ये योजनाएं तो छत्तीसगढ़ व राजस्थान में नहीं थी। इस तरह मजमून साफ था कि दल में अब चौहान की वह चकाचौंध नहीं रही, जिनकी सभी बातें पार्टी आलाकमान आंखें मूंदकर स्वीकार कर लेता था।
राज्य में संपन्न हुए पूरे चुनाव दौरान पार्टी के पोस्टर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही नजर आए। फिर भी शिवराज के पक्ष में इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को किसी एंटी इन्कमबैंसी जैसे फेक्टर का शिकार नहीं होना पड़ा और ऐतिहासिक जीत मिली।
इससे कहीं न कहीं शिवराज को उम्मीदें तो थी कि उन्हें पूरा मान-सम्मान मिलेगा। मगर नए नेता के चयन दौरान जब वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली तक भागदौड़ बनी हुई थी। तब न तो उन्हें बुलावा आया और न ही वे अपनी उपलब्धि बताने आलाकमान के समक्ष हाजिर हुए। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं से मशवरा कर दल ने जब मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया तो बुझे मन से मामाश्री ने इसे स्वीकार तो किया। मगर बुझे मन से कुछ आमसभाओं में ‘मुझे प्रदेश की जनता ने भैया और मामा का जो पद दिया है वह काफी है’ कहकर उन्होंने अपने दिल की कसक जरूर बता दी।

जब इन बातों को लेकर विपक्षी दल के नेता भाजपा पर कटाक्ष करने लगे तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शिवराज को बुलाकर उनके गिले-शिकवे दूर करने का प्रयास किया। खुद शिवराज ने भी मीडिया से कहा कि दल में मेरी अब नई भूमिका रहेगी, मगर वह क्या होगी इसका खुलासा न तो चौहान ने किया और न ही नड्डा ने इसके कोई संकेत दिए।
बहरहाल यह माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर शिवराज और प्रदेश में उन जैसे बड़े नेताओं का उपयोग महती स्थानों पर किया जाएगा। भाजपा इस मामले में भलीभाँति पारंगत है।
ऐसे संकेत भी हैं कि जिस तरह कैलाश विजयवर्गीय को कश्मीर और प.बंगाल भेजकर जो रिजल्ट हासिल किए गए थे, ऐसा ही कोई टास्क शिवराज को दक्षिण भारत के राज्यों में दिया जा सकता है। ताकि मध्यप्रदेश में मोहन यादव की टीम अपना काम बखूबी संभाल सके।
बहरहाल नईदिल्ली में शिवराज सिंह चौहान और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बीच क्या खिचड़ी पकी थी, बस अब यही देखना बाकी है।
